ऐसा क्यों 
क्यों लोग ज़िन्दगी का मोल समझ नहीं पाते ,
 खुदा की रेहमत की कदर नहीं कर पाते
बिन मांगे मिला  है सब उस रब से
जो नहीं है उसके बिना क्यों रह नहीं पाते।
अच्छे वक़्त की कल्पना करते हुए
क्यों बुरे वक़्त से कुछ सीख नहीं पाते।
दुनिया की जगमगाती रौशनी में ,
क्यों सादगी को पहचान नहीं पाते।
पलकों में ख़ाब तोह बसा लेते हैं सब ,
फिर क्यों उनका टूटना सह नहीं पाते।
आँखों में बसी खुशियां तोह दिखती है
पर क्यों उनमें आसुओं को झेल नहीं पाते।
इंसान को भगवान् का नायब तोहफा मानते हैं
फिर क्यों इंसानियत को निभा नहीं पाते।
रिश्ते नाते की दुहाई देने वाले लोग
क्यों उन् रिश्तों को संभाल नहीं पाते।
वह सब कुछ मानते हैं
फिर क्यों कोशिश का एक कदम बढ़ा नहीं पाते
सवर्ग की कामना तोह सब करते हैं
फिर क्यों अपने कर्मों से उस राह को सवार नहीं पाते।
News Reporter

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