शहर

इंसान की एक पहचान उसका शहर  भी होता है

जहाँ उसके बचपन का अलाद्क्पन ,

जवानी के किस्से और ज़िन्दगी की समझ

जैसे उसकी यादों के पिटारे में सिमट जाती  है

कुछ या बहुत सालों का यह सफ़र

जाने कब रास्ता बदल लेता है

और फिर किस मोड़ पर ले जाता है

की बचपन का हर मौसम धुन्दला सा नज़र अत है

वोह सचाई , मासूमियत ,दोस्ती और दोस्त

जैसे एक मोती की माला से बिखरने लग जाते हैं

वोह उंच नीच वोह छुपान छुपी की खेलें

जैसे बचपन के साथ झूट जाते हैं

हर ख़ुशी हर दुःख का गवाह रहा जो शहर

कुछ ही दिनों में अंजना सा लगने लग जाता है

वोह कॉलेज के किस्से , वोह दोस्तों के साथ गुमना

वोह पार्टी करना , वोह बारिश में गुमना

वोह गेरी रौते पर रोज़ शाम की घेरी

यह तोह कुछ यादें है

जोह शब्दों में बियान नही की जा सकती

पर दिल में हमेशा रहेंगी

पर नया शहर  नयी यादों का दर्पण होता है

नया सफ़र ,नए लोग और फिर वोही पुराने किस्से

येही ज़िन्दगी है पर किस्सी मुसाफिर की मंजिल नही …………

News Reporter

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