ऐ ज़िन्दगी

ऐ ज़िन्दगी

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ऐ ज़िन्दगी मैंने तुझे करीब से देखा है  तेरे कुदरत के करिश्मे को रोज़ बदलते देखा है  जैसे सुबह का सूरज अंधकार दूर करता है  वैसे निराशा को उम्मीद में बदलते देखा है    देखा है मैंने कैसे पंछी  भोर पर घोंसले…

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