तम्मना
हर कोई कुछ पाना चाहता है
कोई दौलत तोह कोई मुकाम पाना चाहता है
ऐसी ही चाहत है इस दिल -ऐ -नादान की
जो छोटी सी ज़िन्दगी में बहुत कुछ पाना चाहता है
सब कल्पना करते हैं कुछ बनने की
ज़िन्दगी में मैं भी कुछ पाना चाहती हूँ
सबसे पहले तोह इंसानियत का फ़र्ज़ निभाना चाहती हूँ
इसे पाने के लिए किसी की ख़ुशी
किसी का अरमान बनना चाहती हूँ
किसी का गर्व या किसी का अभिमान बनना चाहती हूँ
या फिर यह कहूं
की किसी की दुआओं में अपना घर बनना चाहती हूँ
किसी के दुत्कार में नहीं
बल्कि किसी के आशीर्वाद में रहना चाहती हूँ
चाहती तोह हूँ किसी का सहारा बनू
पर पहले उसकी हिम्मत बनना चाहती हूँ
चाहती तोह हूँ की दिल की हर चाहत पूरी हो
और उस में खुदा की मंज़ूरी हो
इतने शब्दों में क्या कहूं
अपना जीवन सार्थक बनना चाहती हूँ।
News Reporter

Leave a Reply

Free Email Updates
Get the latest content first.
We respect your privacy.
%d bloggers like this: