मैं 

मैं हूँ 
तो सब कुछ है 
मैं नहीं 
तो कुछ भी नहीं 
मैं सर्वव्यापी भी हूँ 
और सर्वगुण सम्पन भी 
मुझ में ही पंच तत्व भी है 
मुझसे ही यह जंगल नदियों 
पर्वतों और पक्षियों का निर्वाह भी 
मैंने ही धरती उपजाओ बनायीं 
और प्रलय को पुकारा भी 
मैं बना भी सकता हूँ मिटा भी सकता हूँ 
हूँ सर्वशक्तिमान भी 
सही गलत को बनाने वाला 
है मुझे न्यायधीश का अधिकार भी 
मैं ही विष्णु मैं ही कामदेव 
हूँ पूजा और आराधना में भी 
मैं दुयाओं में हूँ ख्यालों में भी 
शुरवात मै हूँ अंत भी 
बस मैं ही मैं हूँ 
और कुछ भी नहीं 
मैं में त्रुटियाँ भी है 
मैं कमज़ोर भी है 
मैं में अहंकार भी है 
और झूठ का अभिमान भी 
डर भी है और क्रोध भी 
संसार संचालक नहीं 
पर भगवान पालक है वोह 
अकेला कुछ भी नहीं 
भ्रम है जिसका कोई आधार नहीं !